बच्चे और परिवार
ठोस खाना शुरू करना: भारतीय परिवारों के लिए बच्चे का पहला खाना

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ठोस खाना शुरू करना एक बड़ा कदम है। घर का जाना-पहचाना खाना अच्छा रहता है, बस बच्चे के हिसाब से उसमें कुछ बदलाव करने होते हैं।
कब शुरू करें
आमतौर पर करीब छह महीने पर शुरू करने की सलाह दी जाती है, जब बच्चा सहारे से बैठ सके, सिर सीधा रख सके और खाने में रुचि दिखाए। बच्चों के डॉक्टर से पूछ लें, ख़ासकर अगर बच्चा समय से पहले हुआ हो या उसे कोई बीमारी हो। माँ का दूध या फ़ॉर्मूला मिल्क आगे भी ज़रूरी रहता है।
क्या दें
शुरुआत के लिए घर का नरम, मसला हुआ खाना अच्छा रहता है: अच्छी तरह पकी दाल, खिचड़ी, मसली हुई सब्ज़ियाँ और मसले हुए फल। आयरन वाली चीज़ें जल्दी शुरू करें, जैसे दाल, और अगर आपका परिवार खाता हो तो अंडा या बारीक कीमा।
क्या न दें
बच्चे के खाने में नमक या चीनी न डालें, और एक साल की उम्र से पहले शहद न दें। साबुत मेवे, सख़्त टुकड़े और गले में अटक सकने वाली दूसरी चीज़ें न दें, और खाते समय हमेशा बच्चे के पास रहें।
माहौल सहज रखें
नई चीज़ अपनाने से पहले बच्चे को कई बार चखना पड़ सकता है, और उसकी भूख रोज़ बदलती रहती है। जब बच्चा दिखाए कि उसका पेट भर गया है तो उसे रुकने दें। ज़बरदस्ती से ज़्यादा फ़ायदा समय के साथ शांति से अलग-अलग चीज़ें देने से होता है।
यह लेख आम जानकारी है, निजी मेडिकल सलाह नहीं। अपनी सेहत के बारे में कृपया अपने डॉक्टर या किसी योग्य विशेषज्ञ से बात करें।




